जीवन
मैं बात करुंगा जीवन की कहानी से, ये कहानी जो जीवन का सही मतलब बताती हैं। बात उस वक्त की है। पहाडो में बसा एक सुंदरसा गाँव था। सभी लोग कुछ ना कुछ काम कर के अपना पेट पालते थे। मेहनत से अपनी अपनी खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। उसी गाँव में एक नौजवान अपनी बुढी माँ के साथ एक छोटी सी झोपडी में रहता था। लडका बडा मेहनती था। हररोज सुबह जंगल में जाता लकडीया काटता और दिनभर लकडीया बेचकर जो कुछ पैसे मिलते उससे राशन खरीदकर बचा हुआ पैसा माँ को दे देता था। दिनभर लकडी बेचने के बाद कुछ एक रुपया मिलता था।उससे पचीस पैसे बचाकर रखती की इस आस में की एक दिन वो पैसे उसके लडके शादी के लिये उपयोग में आए। पर उस बिचारी को यह पता नही था की ऐसे पुंची एकठ्ठा करने उसके लडके की शादी कभी नही हो सकती थी। एक दिन वो दोनो माँ बेटे शाम को खाना खाने बैठे थे। तभी बाहर से आवज आई ~शहद ~ले लो ~शहद ~मीठा ~~मीठा ~शहद ।वह आवाज सुनकर बेटा बोला,, "माँ आज शहद खाते हैं। तो माँ बोली "बेटे शहद तो बडा महँगा हैं। पर फिर भी बेटा नहीं माना बोला "कुछ भी हो, मैं शहद खाऊँगा। बेटे की जिद के सामने माँ की एक ना चल...